अनन्तकर्म शौचं च जपो यज्ञस्तथैव च। तीर्थयात्राभिगमनं यावत्तत्त्वं न विन्दति ॥
विभिन्न कर्म-शौच, जप, यज्ञ, तीर्थयात्रा आदि को सार्थकता तभी तक है, जब तक तत्त्व की प्राप्ति न हो।
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