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पैंगल • अध्याय 4 • श्लोक 21
तपेद्वर्षसहस्त्राणि एकपादस्थितो नरः । एतस्य ध्यानयोगस्य कलां नार्हति षोडशीम्॥
यदि कोई एक पैर पर खड़े होकर एक सहस्त्र वर्ष तक तप करे, तो भी वह ध्यान योग की षोडश कलाओं में से एक के बराबर भी नहीं हो सकता।
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