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पैंगल • अध्याय 4 • श्लोक 11
यावच्चोपाधिपर्यन्तं तावच्छुश्रूषयेद्गुरूम्। गुरुवद्गुरूभार्यायां तत्पुत्रेषु च वर्तनम् ॥
जब तक सांसारिक उपाधियाँ हैं, तब तक गुरु की शुश्रूषा (सेवा) करनी चाहिए। गुरु के समान ही गुरु पत्नी और गुरु सन्तानों के प्रति भी सम्मान पूर्ण व्यवहार करना चाहिए।
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