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पैंगल • अध्याय 3 • श्लोक 9
घ्यात्वा मध्यस्थमात्मानं कलशान्तरदीपवत्। अङ्गुष्ठमात्रमात्मानमधूमज्योति रूपकम्॥
कलश के अन्दर स्थित दीपक के सदृश, शरीर में स्थित (हृदय कमल के मध्यस्थित) धूम रहित ज्योति स्वरूप आश परिमाण आत्मा का ध्यान करके जो मुनि अन्तःप्रान्त में स्थित
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