स होवाच याज्ञवल्क्यस्तत्त्वमसि त्वं तदसि त्वं ब्रह्मास्यहं ब्रह्मास्मीत्यनुसंधानं कुर्यात्॥
याज्ञवल्क्य बोले - ‘वह तुम हो’ (तत्त्वमासि), ‘तुम वह हो’ (त्वं तदसि), ‘तुम ब्रह्म हो’ (त्वं ब्रह्मासि), ‘मैं ब्रह्म हूँ’ (अहं ब्रह्मास्मि), ये महावाक्य हैं, जिन पर अनुसन्धान (विचार) करना चाहिए।
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