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पैंगल • अध्याय 1 • श्लोक 10
सत्त्वसमष्टित इन्द्रियपालकानसृजत् ।तानि सृष्टान्यण्डे प्राचिक्षिपत् । तदाज्ञया समष्टयण्डं व्याप्य तान्यतिष्ठन्। तदाज्ञयाऽहंकारसमन्वितो विराट् स्थूलान्यरक्षत्। हिरण्यगर्भस्तदाज्ञया सूक्ष्माण्यपालयत् ॥
सत्त्व समष्टि से उसने पाँचौं इन्द्रियों के पालक देवताओं का सृजन किया और उन्हें ब्रह्माण्डों में स्थापित कर दिया। उसकी (विष्णु रूप ब्रह्म की) आज्ञा से वे सभी (देवगण) ब्रह्माण्डों में स्थित होकर निवास करने लगे। उस (ब्रह्म) की आज्ञा से अहंकार समन्वित विराट्, स्थूल जगत् का संरक्षण करने लगा। हिरण्यगर्भ उसकी आज्ञा से सूक्ष्म तत्त्व का पालन करने लगा।
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