हे शाकल! इस लोक में अति गोपनीय बातों में भी जो अति गूढ़ है, उसे सुनो। वह है 'सद्योजात' नामक ब्रह्म। सभी तरह की अभीष्ट सिद्धियों को देने वाली मही, पूषा, रमा, ब्रह्मा, त्रिवृत् (सत्, रज, तम), अकारादि स्वर, त्र्ऋग्वेद, गार्हपत्य (अग्रि), विविध मंत्र (नमः शिवाय आदि) सात स्वर (स.रे.ग.म.प.ध.नि), पीला वर्ण (रंग) तथा क्रिया नामक शक्ति आदि जिसके अनेक स्वरूप हैं।
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