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पंचब्रह्म • अध्याय 1 • श्लोक 2
कति वर्णाः । कति भेदाः। कति शक्तयः। यत्सर्वं तद्रुह्यम् ॥
इसके कितने वर्ण हैं? कितने भेद (प्रकार) हैं? तथा कितनी शक्तियाँ हैं? ये समस्त बातें बड़ी गोपनीय हैं (अतः अनधिकारियों से छिपाकर रखनी चाहिए)।
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