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पंचब्रह्म • अध्याय 1 • श्लोक 13
एवमुक्त्वा महादेवो गालवस्य महात्मनः। कृां चकार तत्रैव स्वान्तर्धिमगमत्स्वयम् ॥
इस प्रकार इस ज्ञान को महादेव जी 'गालव' मुनि को कृपापूर्वक बताते हुए वहीं आत्मलीन हो गए।
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