जिस मनुष्य के पूर्व जन्म के उत्तम कर्म – पुण्य – अधिक होते हैं, उनके लिए भयानक वन, नगर हो जाता है। सभी मनुष्य उसके हितचिंतक मित्र हो जाते हैं और सारी पृथ्वी उसके लिए रत्नपूर्ण हो जाती है।
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