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नीति शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 81
शशिदिवाकरयोग्रहपीडनं गजभुजङ्गमयोरपिबन्धनम् । मतिमतांचविलोक्य दरिद्रतां विधिरही ! बलवानिति मे मतिः ।।
हाथी और सर्प में बंधन को देखकर, सूर्य और चन्द्रमा में ग्रहण लगते देखकर और बुद्धिमानो की दरिद्री देखकर – मेरी समझ में यही आता है, कि विधाता ही सबसे बलवान है।
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