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नीति शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 72
ऐश्वर्यस्य विभूषणं सुजनता शौर्यस्य वाक्संयमो । ज्ञानस्योपशमः श्रुतस्य विनयो वित्तस्य पात्रे व्ययः । । अक्रोधस्तपसः क्षमा प्रभावितुर्धर्मस्य निर्व्याजता । सर्वेषामपि सर्वकारणमिदं शीलं परं भूषणम् ।।
ऐश्वर्य का भूषण सज्जनता, शूरता का भूषण अभिमान रहित बात करना, ज्ञान का भूषण शान्ति, शास्त्र देखने का भूषण विनय, धन का भूषण सुपात्र को दान देना, तप का भूषण क्रोधहीनता, प्रभुता का भूषण क्षमा और धर्म का भूषण निश्छलता है, किन्तु अन्य सब गुणों का कारण और सर्वोत्तम भूषण ‘शील’ है।
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