मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
नीति शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 71
क्वचिदभूमौ शय्या क्वचिदपि च पर्यङ्कशयनम । क्वचिच्छाकाहारी क्वचिदपि च शाल्योदनरुचि: ।। क्वचित्कन्थाधारी क्वचिदपि च दिव्याम्बरधरो । मनस्वी कार्यार्थी न गणयति दु:खं न च सुखम्।।
कभी जमीन पर सो रहते हैं और कभी उत्तम पलंग पर सोते हैं, कभी साग-पात खाकर रहते हैं, कभी दाल-भात कहते हैं, कभी फटी पुराणी गुदड़ी पहनते हैं और कभी दिव्य वस्त्र धारण करते हैं – कार्यसिद्धि पर कमर कस लेने वाले पुरुष सुख और दुख दोनों को ही कुछ नहीं समझते।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
नीति शतकम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

नीति शतकम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें