नम्रता से ऊँचे होते हैं,पराये गुणों का कीर्तन करके अपने गुणों को प्रसिद्ध कर लेते हैं – पराया भला करने से दिल लगाकर अपना मतलब भी बना लेते हैं और निन्दा करनेवाले दुष्टों को अपनी क्षमाशीलता से ही लज्जित करते हैं – ऐसे आश्चर्यकारक आचरण से सभी के माननीय सत-पुरुष संसार में किसके पूज्य्नीय नहीं हैं?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
नीति शतकम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
नीति शतकम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।