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नीति शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 47
राजन्दुधुक्षसि यदि क्षितिधेनुमेतां तेनाद्य वत्तमिव लोकममुं पुषाण । तस्मिंश्च सम्यगनिइां परिपोष्यमाणे नानाफलैः फलति कल्पलतेव भूमिः॥
हे राजा! अगर तुम पृथ्वी रुपी गाय को दुहना चाहते हो, तो प्रजा रुपी बछड़े का पालन पोषण करो। यदि तुम प्रजा रुपी बछड़े का अच्छी तरह पालन पोषण करोगे, तो पृथ्वी स्वर्गीय कल्पलता की तरह आपको नाना प्रकार के फल देगी।
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