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नीति शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 39
सिंहः शिशुरपि निपतति मदमलिनकपोलभित्तिषु गजेषु । प्रकृतिरियं सत्त्ववतां न खलु वयस्तेजसो हेतुः॥
सिंह चाहे छोटा बालक भी हो, तो भी वह मद से मलीन कपोलो वाले उत्तम गज के मस्तक पर ही चोट करता है। यह तेजस्वियों का स्वभाव ही है। निस्संदेह अवस्था तेज के कारण नहीं होती।
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