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नीति शतकम् • अध्याय 1 • श्लोक 35
भामिनि विलास:वेतंडगंडकंडूति पाण्डित्य परिपंथिना। हरिणा हरिणालीषु कथ्यताम कः पराक्रमः।।
गजगंडस्थल की कंडू (खुजली) को नाश करनेवाला सिंह हरिणों में अपने किस पराक्रम का वर्णन करे? (वीर पुरुष स्व समान पुरुषों ही में अपना पराक्रम प्रकट करते हैं, नीचों में नहीं)।
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