यदि क्षमा है तो कवच की क्या आवश्यकता? यदि क्रोध है तो शत्रुओं की क्या जरुरत है? यदि स्वजातीय है तो अग्नि का क्या प्रयोजन? यदि सुन्दर ह्रदय वाले मित्र हैं, तो आशुफलप्रद दिव्य औषधियों से क्या लाभ? यदि दुर्जन है तो सर्पों से क्या? यदि निर्दोष विद्या है तो धन से क्या प्रयोजन? यदि लज्जा है तो जेवरों की क्या जरुरत? यदि सुन्दर कविताशक्ति है तो राजवैभव का क्या प्रयोजन?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
नीति शतकम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
नीति शतकम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।