न मृत्युर् न शंका न मे जातिभेद:
पिता नैव मे नैव माता न जन्म
न बन्धुर् न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य:
चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
न मुझे मृत्यु का भय है (मृत्यु भी कैसी?), मैं अपने सच्चे आत्म, मेरे अस्तित्व के बारे में कोई संदेह नहीं है से कोई अलग नहीं है, और न ही जन्म के आधार पर मैं भेदभाव किया है। न मेरा कोई पिता है, न माता और न लिया ही है मैंने कोई जन्म । न मैं कोई बन्धु, न मित्र और न ही कोई गुरु या शिष्य ही हूँ। वस्तुतः मैं चिर आनन्द हूँ, चिन्मय रूप शिव हूँ, शिव हूँ।
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