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निर्वाण षटकम् • अध्याय 1 • श्लोक 3
न मे द्वेष रागौ न मे लोभ मोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्य भाव: न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
न मुझमें द्वेष है, न राग है, न लोभ है, न मोह,न मुझमें अहंकार है, न ईर्ष्या की भावना न मुझमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ही हैं,वस्तुतः मैं चिर आनन्द हूँ, चिन्मय रूप शिव हूँ, शिव हूँ।
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