प्रकृतिरिति च ब्रह्मणः सकाशान्नानाविचित्रजगन्निर्माणसामर्थ्यबुद्धिरूपा ब्रह्मशक्तिरेव प्रकृतिः॥
प्रकृति वही है, जो ब्रह्म की शक्ति है। वही बुद्धिरूप होकर ब्रह्म से विविध एवं विचित्र जगत् की रचना करने की सामर्थ्य रखती है। उसी ब्रह्मशक्ति को प्रकृति कहा जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
निरालम्ब के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
निरालम्ब के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।