ग्राह्यमिति च देशकालवस्तुपरिच्छेदराहित्यचिन्मात्रस्वरूपं ग्राह्यम्॥
देश, काल, वस्तु की मर्यादा से परे चिन्मात्र स्वरूप(जो कुछ है, वह) ही ग्रहण करने योग्य(ग्राह्य) है।
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