बन्ध इति च अनाद्यविद्यावासनया जातोऽहमित्यादिसंकल्पो बन्धः॥
अनादि अविद्या की वासना(संस्कार) द्वारा उत्पन्न इस प्रकार का विचार कि ‘मैं हूँ’, यही बन्धन है।
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