स्वर्ग इति च सत्संसर्गः स्वर्गः।
नरक इति च असत्संसारविषयजनसंसर्ग एवं नरकः ॥
सत् का (अनश्वर का) समागम (सत्पुरुषों का सत्संग) ही स्वर्ग है। असत्(नश्वर) संसार के विषयों (में रचे-पचे लोगों) का संसर्ग ही नरक है।
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