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नासदीय सूक्त • अध्याय 1 • श्लोक 7
इ॒यं विसृ॑ष्टि॒र्यत॑ आब॒भूव॒ यदि॑ वा द॒धे यदि॑ वा॒ न । यो अ॒स्याध्य॑क्षः पर॒मे व्यो॑म॒न्सो अ॒ङ्ग वे॑द॒ यदि॑ वा॒ न वेद॑ ॥
यह विविधरूपा सृष्टि जहाँ से उत्पन्न हुई (आयी) है, (उसको उसने) या तो धारण किया था अथवा यदि नहीं (धारण किया था) (तो किसने धारण किया था) । जो इसका स्वामी है, वह ऊंचे स्वर्गलोक में (है); निश्चित रूप से (वह इसको) जानता है अथवा यदि (वह) नहीं जानता है (तो कौन जानता है)।
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