सर्वप्रथम काम, जो मन का प्रथम विकार था, वह उत्पन्न हुआ। प्रज्ञावान् (क्रान्तद्रष्टा) लोगों ने हृदय (अन्तःकरण) में प्रज्ञा द्वारा विचार करके असत (नामरहित तत्त्व) मे सत् (नामरूपात्मकजगत्) के (मूलकारणरूप) सम्बन्ध को जाना ।
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