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नासदीय सूक्त • अध्याय 1 • श्लोक 3
तम॑ आसी॒त्तम॑सा गू॒ळ्हमग्रे॑ऽप्रके॒तं स॑लि॒लं सर्व॑मा इ॒दम् । तु॒च्छ्येना॒भ्वपि॑हितं॒ यदासी॒त्तप॑स॒स्तन्म॑हि॒नाजा॑य॒तैक॑म् ॥
(सृष्टि से) पहले अन्धकार से आच्छादित (ढका हुआ) अन्धकार था। यह सम्पूर्णं (विश्च का कारण भूत) चिन्हरहित (भेदात्मकज्ञान-रहित) जल था। (इससे भित्र कोई चिह्न नहीं था) जो (भावरूप) अज्ञान से आवृत सर्वव्यापी था। वह एक (अद्वित्य) (अपनी) तपस्या की महिमा से उत्पन्न हुआ।
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