मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मुद्गल • अध्याय 4 • श्लोक 8
कुलगोत्रजातिवर्णाश्रमरूपाणि षड्भ्रमाः॥
कुल, गोत्र, जाति, वर्ण, आश्रम और रूप — ये षड्भ्रम (आत्मा के विषय में होने वाले छह प्रकार के मिथ्या अभिमान अथवा भ्रान्तियाँ) कहलाते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मुद्गल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मुद्गल के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें