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मुद्गल • अध्याय 4 • श्लोक 5
अन्नमयप्राणमयमनोमयविज्ञानमयानन्दमया इति पञ्चकोशाः॥
अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनन्दमय — ये पञ्चकोश (जीव के पाँच आवरण) कहलाते हैं।
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