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मुद्गल • अध्याय 4 • श्लोक 2
तापत्रयं त्वाध्यात्मिकाधिभौतिकाधिदैविकं कर्तृकर्मकार्यज्ञातृज्ञानज्ञेयभोक्तृ-भोगभोग्यमिति त्रिविधम्॥
तापत्रय तीन प्रकार का माना गया है— आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक। इसी प्रकार यह त्रिविध भेद भी है— कर्ता–कर्म–कार्य, ज्ञाता–ज्ञान–ज्ञेय, तथा भोक्ता–भोग–भोग्यब्रह्म इन समस्त त्रिविध भेदों से परे और उनसे सर्वथा विलक्षण है।
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