तापत्रय तीन प्रकार का माना गया है— आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक।
इसी प्रकार यह त्रिविध भेद भी है—
कर्ता–कर्म–कार्य,
ज्ञाता–ज्ञान–ज्ञेय, तथा
भोक्ता–भोग–भोग्य।
ब्रह्म इन समस्त त्रिविध भेदों से परे और उनसे सर्वथा विलक्षण है।
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