य इमं सृष्टियज्ञं जानाति मोक्षप्रकारं च सर्वमायुरेति ॥
जो पुरुष इस सृष्टिरूप यज्ञ तथा मोक्ष की प्रक्रिया को यथार्थ रूप से जान लेता है, वह पूर्ण आयु को प्राप्त करता है और परम पुरुषार्थ की सिद्धि प्राप्त करता है।
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