मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मुद्गल • अध्याय 1 • श्लोक 7
तं यज्ञमिति मन्त्रेण सृष्टियज्ञः समीरितः । अनेनैव च मन्त्रेण मोक्षश्च समुदीरितः ॥
"तं यज्ञम्" मन्त्र द्वारा सृष्टिरूप यज्ञ का वर्णन किया गया है। और इसी मन्त्र के द्वारा मोक्ष का भी प्रतिपादन किया गया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मुद्गल के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मुद्गल के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें