"यत्पुरुषेण" मन्त्र द्वारा सृष्टिरूप यज्ञ का वर्णन किया गया है।
और "सप्तास्यासन् परिधयः" मन्त्र में उस यज्ञ के परिधियों तथा समिधाओं का प्रतिपादन किया गया है।
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