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मुद्गल • अध्याय 1 • श्लोक 3
विष्णोर्मोक्षप्रदत्वं च कथितं तु तृतीयया । एतावानिति मन्त्रेण वैभवं कथितं हरेः ॥
तृतीय ऋचा द्वारा भगवान् विष्णु के मोक्षप्रदाता स्वरूप का वर्णन किया गया है। और "एतावान्" मन्त्र के द्वारा भगवान् हरि के ऐश्वर्य, महिमा और वैभव का प्रतिपादन किया गया है।
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