जिस (अलकापुरी) में गङ्गा नदी के जल से शीतल पवनों द्वारा सेवा की जाती हुई, किनारों पर उगे हुए, मन्दार वृक्षों की छाया से रोकी गयी धूप वाली, देवताओं के द्वारा चाही जाने वाली, कन्याएँ सोने की बालू में मुट्ठी में रखकर छिपायी गयी, (अतएव) खोजी जाने वाली मणियों से खेलती हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।