एतत्कृत्वा प्रियमनुचितप्रार्थनावर्तिनो मे सौहार्दाद्वा विधुर इति वा मय्यनुक्रोशबुद्ध्या ।
इष्टान्देशाञ्जलद विचर प्रावृषा संभूतश्रीर्मा भूदेवं क्षणमपि च ते विद्युता विप्रयोगः ॥
हे मेघ! प्रेम के कारण अथवा वह दुःखी (वियोगी) है इसलिए मेरे प्रति दया-भाव के कारण मुझ अनुधित प्रार्थना करने वाले का यह प्रिय करके वर्षा ऋतु से बड़ी हुई शोभा वाले (तुम) इच्छित देशों में विचरण करना और इस प्रकार (अर्थात् मेरे समान) क्षण भर के लिए भी तेरा बिजली से वियोग न होवे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।