भगवान् विष्णु के शेषनागरूपी शय्या से उठ जाने पर मेरे शाप का अन्त (होगा) (इसलिए) तू शेष चार महीने आँख मींधकर बिता ले। फिर हम दोनों विरह में विचारी गयी उन-उन अपनी इच्छाओं को ढली हुई शरद् ऋतु की चाँदनी वाली रात्रियों में भोगेंगे।
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