जिस (अलकापुरी) में यक्ष सुन्दर स्त्रियों के साथ मिलकर स्फटिक मणि से जटित (अतः) तारों के प्रतिबिम्ब रूपी पुष्पों से सुशोभित, महलों को अटारियों पर जाकर तुम्हारे समान गम्भीर ध्वनि वाले पुष्कर नामक बाजों (नगाड़ों) के धीरे-धीरे बजाये जाने पर, कल्पवृक्ष से उत्पन्न रतिफल नामक मदिरा का सेवन करते हैं।
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