जो (मेरा प्रिय) तेरी सखियों के सामने शब्दों से कहने योग्य भी जो (होता था), उसे सचमुच (तेरे) मुख के स्पर्श के लोभ से कान में कहने के लिए लालायित रहता था, कानों की पहुँच से बाहर हुआ (तथा) नेत्रों से न दिख पड़ने वाला यह (तेरा प्रिय) उत्सुकता से रचे गये शब्दों वाले इस (सन्देश) को मेरे मुख से तुमसे कहता है।
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