तामायुष्मन्मम च वचनादात्मनश्चोपकर्तुं ब्रूया एवं तव सहचरो रामगिर्याश्रमस्थः ।
अव्यापन्नः कुशलमबले पृच्छति त्वां वियुक्तः पूर्वाभाष्ये सुलभविपर्दा प्राणिनामेतदेव ।।
हे आयुष्मन्! मेरी ओर से और अपने को उपकृत करने के लिए उस (मेरी प्रिया) से इस प्रकार कहना - 'हे अबले! तुम्हारा साथी (पति) रामगिरि आश्रम में रहता हुआ जीवित है, बिछुड़ा हुआ (यह) तुम्हारा कुशल पूछता है।' सहज ही विपत्ति में पड़ने वाले प्राणियों से यह ही पहले पूछना चाहिये।
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