मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मेघदूतम् • अध्याय 2 • श्लोक 4
आनन्दोत्यं नयनसलिलं यत्र नान्यैर्निमित्तैर्नान्यस्तापः कुसुमशरजादिष्टसंयोगसाध्यात् । नाप्यन्यस्मात्प्रयणयकलहा 'द्विप्रयोगोपपत्तिवित्तेशानां न च खलु वयो यौवनादिन्यदस्ति ॥
जहाँ (अलकापुरी में) यक्षों के आँसू आनन्द या प्रसन्नता से उत्पन्न (होते है), अन्य कारणों से नहीं, प्रियजन के मेल से दूर होने वाले, कामदेव के वाण से उत्पन्न (ताप) के अतिरिक्त (अन्य कोई) सन्ताप नहीं है, प्रणय कलह के अतिरिक्त अन्य (कारण) से वियोग की प्राप्ति भी नहीं (है) और यौवन के अतिरिक्त कोई दूसरी अवस्था भी नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें