हे सौभाग्यवति! मुझे (अपने) पति का प्रिय मित्र (और) हृदय में रखे हुए उसके संदेशों के साथ तेरे समीप आया हुआ मेघ जानो, जो (मेघ) (अपनी) गम्भीर और मधुर ध्वनियों से अबलाओं की चोटियों को खोलने को उत्सुक (तथा) मार्ग में थके हुए प्रवासियों के समूहों को (घर लौटने के लिये) प्रेरित करता है।
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