जहाँ (अलकापुरी में) वृक्ष सदा पुष्यों से युक्त (एवं) मतवाले भ्रमरों से गुञ्जायमान (है), कमलनियाँ सदा कमलों से युक्त (तथा) हंसों की पंक्तियों से बनी करबनियों वाली (है), भवनों के (पालतू) मोर चमकने वाले पंखों वाले (और) बोलने के लिए गरदन उठाये हुए और रातें नित्य चाँदनी से युक्त (अतः) नष्ट हुए अन्धकार के प्रसार वाली और सुन्दर हैं।
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