मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मेघदूतम् • अध्याय 2 • श्लोक 3
यत्रोन्मत्तभ्रमरमुखराः' पादपा नित्यपुष्याः हंसश्रेणीरचितरशना नित्यपद्माः नलिन्यः। केकोत्कण्ठाः भवनशिखिनो नित्यभास्वत्कलापाः नित्यज्योत्स्नाः प्रतिहततमोवृत्तिरम्याः प्रदोषाः ॥
जहाँ (अलकापुरी में) वृक्ष सदा पुष्यों से युक्त (एवं) मतवाले भ्रमरों से गुञ्जायमान (है), कमलनियाँ सदा कमलों से युक्त (तथा) हंसों की पंक्तियों से बनी करबनियों वाली (है), भवनों के (पालतू) मोर चमकने वाले पंखों वाले (और) बोलने के लिए गरदन उठाये हुए और रातें नित्य चाँदनी से युक्त (अतः) नष्ट हुए अन्धकार के प्रसार वाली और सुन्दर हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें