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मेघदूतम् • अध्याय 2 • श्लोक 22
तन्वी श्यामा शिखरिदशना पक्वबिम्बाधरौष्ठी मध्ये क्षामा चकितहरिणीप्रेक्षणा निम्ननाभिः । श्रोणीभारादलसगमना स्तोकनम्म्रा स्तनाध्यां या तत्र स्याद्युवतिविषये सृष्टिराद्येव धातुः ॥
वहाँ (भवन के अन्दर) पतले शरीर वाली, नवयौवन वाली, नुकीले दाँतों वाली, पके हुए बिम्बफल के समान नीचे के ओठ वाली, पतली कमर वाली, डरी हुई हरिणी के समान चितवन वाली, गहरी नाभि वाली, नितम्बों के भार के कारण मन्दगति वाली, स्तनों के कारण कुछ झुकी हुई, युवतियों के विषय में ब्रह्मा की मानो सर्वप्रथम रचना हो (उसे मेरा दूसरा प्राण समझना)।
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