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मेघदूतम् • अध्याय 2 • श्लोक 17
तस्यास्तीरे' रचितशिखिरः पेशलैरिन्द्रनीलैः क्रीडाशैलः कनककदलीवेष्टनप्रेक्षणीयः। मद्नेहिन्याः प्रिय इति सखे चेतसा कातरेण प्रेक्ष्योपान्तस्फुरिततडितं त्वां तमेव स्मरामि ॥
उस (बावड़ी) के किनारे पर सुन्दर इन्द्रनीलमणियों से निर्मित शिखरों वाला (और) सुनहरी केलियों की बाड़ के कारण दर्शनीय क्रीड़ा पर्वत है। हे मित्र! किनारों पर चमकती हुई बिजली वाले तुमको देखकर - मेरी पत्नी का प्रिय है - इस कारण व्याकुल चित्त से उसी का (क्रीड़ा पर्वत का) स्मरण कर रहा हूँ।
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