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मेघदूतम् • अध्याय 2 • श्लोक 16
वांपी चास्मिन्मरकतशिलाबद्धसोपानमार्गा हैमैश्छन्ना विकचमकलैः स्निग्धवैदूर्यनालैः । यस्यास्तोये कृतवसतयो मानर्स सन्निकृष्टं नाध्यास्यन्ति व्यपगतशुचस्त्वामपि प्रेक्ष्य हंसाः ॥
और इस (मेरे घर) में पन्ने की शिलाओं से बनी सीढ़ियों के मार्ग वाली, चिकने लहसुनिये रत्न के समान नाल वाले, स्वर्णमय, विकसित कमलों से ढकी हुई बावड़ी है, जिसके जल में निवास करने वाले, अतः नष्ट हुए दुःख वाले हंस तुम्हें देखकर भी समीपवर्ती मानसरोवर को जाने के लिए उत्कण्ठित नहीं होंगे।
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