मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मेघदूतम् • अध्याय 2 • श्लोक 13
पत्र श्यामा दिनकरहयस्पर्धिनो यत्र वाहाः शैलोदप्रास्त्वमिव करिणो वृष्टिमन्तः प्रभेदात् । योधाप्रण्यः प्रतिदशमुखं संयुगे तस्थिवांसः प्रत्यादिष्टाभरणरुचयश्चन्द्रहासव्रणाङ्गैः ॥
जिस (अलकापुरी) में घोड़े पत्तों के समान हरे (इसलिए) वर्ण और वेग में सूर्य के घोड़ों से प्रतिस्पर्धा करने वाले हैं, हाथी पर्वतों के समान ऊँचे तथा मद के टपकने (बहने) के कारण तुम्हारे समान वर्षा करने वाले हैं, श्रेष्ठ योद्धा युद्ध में रावण के सामने टिके हुये (इसलिए रावण की) चन्द्रहास नामक तलवार के घाव रूपी चिन्हों के कारण आभूषण धारण करने की इच्छा को छोड़े हुए हैं ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें