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मेघदूतम् • अध्याय 2 • श्लोक 12
वासश्चित्रं मधु नयनयोर्विभ्रमादेशदक्षं पुष्पोद्भेदं सह किसलयैर्भूषणानां विकल्पम् । लाक्षारार्ग चरणकमलन्यासयोग्यं च यस्यामेकः सूते सकलमबलामण्डनं कल्पवृक्षः ॥
जिस (अलकापुरी) में अनेक वर्षों के वस्त्रों को, नेत्रों को विलास सिखाने में समर्थ मदिरा को, नवपल्लवों के साथ पुष्पों के विकास को, आभूषणों के अनेक प्रकार तथा चरण रूपी कमल में लगाने योग्य महावर - इस प्रकार स्त्रियों की सम्पूर्ण प्रसाधन सामग्री को अकेला कल्पवृक्ष ही उत्पन्न करता है।
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