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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 9
तां चावश्यं दिवसगणनातत्परामेकपत्नीमव्यापन्नामविहतगतिर्द्रक्ष्यसि भ्रातृजायाम् । आशाबन्धः कुसुमसदृशं प्रायशो ह्यङ्गनानां सद्यः पाति प्रणयि' हदयं विप्रयोगे रुणद्धि ॥
तुम बेरोक-टोक गति वाले, (विरह के शेष) दिनों की गणना में लगी हुई पतिव्रता (अपनी) उस भाभी को जीवित अवश्य देखोगे; क्योंकि आशारूपी बन्ध (तन्तु) स्त्रियों के फूल के समान (कोमल), वियोग में शीघ्र नष्ट हो जाने वाले प्रेमी हृदय को प्रायः रोके रखता है।
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