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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 7
संतप्तानां त्वमसि शरणं तत्पयोद ! प्रियायाः संदेशं मे हर धनपति 'क्रोधविश्लेषितस्य । गन्तव्या ते वसतिरलका नाम यक्षेश्वरार्णा बाह्योद्यानस्थितहरशिरश्चन्द्रिका धौतहर्ष्या ॥
(हे) मेघ! तुम (विरह) पीड़ितों के रक्षक हो, इसलिए कुबेर के क्रोध से (प्रिया से) वियुक्त हुए मेरे सन्देश को प्रिया के पास ले जाओ। तुम्हें बाहर के उद्यान में विद्यमान शिव के सिर पर स्थित चाँदनी से उज्ज्वल महलों से युक्त अलका नाम वाली यक्षों के स्वामी (कुबेर) की नगरी जाना है।
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